टीपू सुल्तान की जयंती पर बीजेपी का विरोध, सुरक्षकर्मियों के बीच कांग्रेस मना रही है जयंती

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टीपू सुल्तान की जयंती पर बीजेपी का बवाल

टीपू सुल्तान
फ़ोटो सौजन्य: गूगल

बंगलुरु: आज 18वीं सदी में मैसूर के शासक रहे टीपू सुल्तान की आज जयंती है जिसको कर्नाटक में कांग्रेस सरकार भारी-भरकंप सुरक्षा और विरोध प्रदर्शन के बीच मना रही है। कार्यक्रम के विरोध में यहां मदिकेरी में राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों पर पत्थबाजी की गई। कोडागू में इसी को ध्यान में रखते हुए धारा 144 लागू कर दी गई है। जबकि बेंगलुरु शहर में भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया है।

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पूरे कर्नाटक राज्य में इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए 11 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। वहीं, राज्य भर में शराब की बिक्री भी रोकी गई है। सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली सरकार यहां तीन सालों से 18 सदी के दौरान मैसूर के शासक रहे टीपू को स्वतंत्रता सेनानी के रूप में सम्मानित कर रही है पर बीजेपी और आरएसएस इसका पुरजोर विरोध कर रही है।

क्यों कर रही है बीजेपी और और कुछ दल टीपू सुल्तान की जयंती के विरोध??

टीपू सुल्तान
फ़ोटो सौजन्य: गूगल

कोडावा समुदाय, भाजपा और कुछ दक्षिणपंथी संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। उनके मुताबिक, टीपू धार्मिक आधार पर कट्टर था। जबरन उसने लोगों का धर्म परिवर्तन कराकर इस्लाम कबूल कराता था।

इतना ही नहीं टीपू सुल्तान को लेकर पिछले दिनों राजनीतिक विवाद काफी गहरा रहा है। पिछले दिनों राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने भी टीपू की प्रशंसा करते हुए कहा था कि वो अंग्रेजों से लड़ते हुए बहादुरों की तरह मरे। वहीं नरेंद्र मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री अनन्त कुमार हेगड़े ने टीपू सुल्तान को हजारों हिंदुओं का हत्यारा ठहरा रहे हैं।

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कौन थे टीपू सुल्तान??

टीपू सुल्तान
फ़ोटो सौजन्य: गूगल

टीपू सुल्तान जिनका पूरा नाम फतेह अली खान साहब था हैदर अली के पुत्र थे जिन्होंने 18वीं सदी में मैसूर पर राज किया। टीपू को इतिहास के पन्नों  में ‘टाइगर ऑफ मैसूर’ के नाम से भी जाना जाता है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने दिए गए एक बयान में कहा था कि टीपू सुल्तान ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में पहली बार मैसूर रॉकेट का इस्तेमाल किया। इतिहास में भी कई जगह इस बात को कहा गया है कि भारत में रॉकेट टेक्नोलॉजी उन्ही के द्वारा ही लाई गई थी।

आपको ज्ञात हो कि टीपू सुल्तान ने मैसूर की रक्षा करते हुए अंग्रेजों से चार लड़ाइयां लड़ीं थी जिसमे चौथी लड़ाई में उनको मृत्यु की प्राप्ति हुई।

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