“गवर्नमेंट कॉलोनी” अवैध अतिक्रमण की चपेट में, स्थानीय प्रशासन का सरंक्षण?

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सौजन्य गूगल, प्रतीकात्मक तस्वीर

एक तरफ राज्य में मौजूदा बीजेपी सरकार भले ही, भ्रष्टाचार पर ज़ीरो टोलॉरेन्स की बात करती हो, वही दूसरी तरफ़ अपने सरकारी कर्मचारियों के निवास स्थान पर भ्रष्टाचार के दम पर बने अवैध अतिक्रमण पर कार्रवाई करने का जोखिम नहीं उठा रहीं। मामला है बांद्रा पूर्व स्थित गवर्नमेंट कॉलोनी का, जहाँ स्थानीय प्रशासन के रहमों करम के बलबूते अवैध अतिक्रमण जोरो-शोरों से किया जा रहा है। ताज्जुब की बात है सरकारी अमला आँखे मूंदे कुम्भकर्ण की नींद सो रहा हैं।

स्थानीय लोगों के दावों पर गौर करे तो लोगो का कहना हैं कि पिछले 5 वर्षों के अंदर अवैध निर्माण में तेजी आई हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी की माने तो स्थानीय पुलिस कार्रवाई के नाम पर इतवार को आँखे मूंदकर, अवैध अतिक्रमण के पास आती है और मुस्कुरा कर चली जाती हैं। पता नहीं कौन सी संजीवनी-बूटी है जो इन अवैध अतिक्रमण को सरंक्षण दे रहीं हैं। नाम न बताने की शर्त पर स्थानीय निवासी ने बताया कि कई सरकारी कर्मचारियों ने अवैध निर्माण कर दुकाने किरायें पर दे रखी है, कई कर्मचारियों के पास एक से अधिक दुकाने है, जिसका किराया ही तकरीबन सरकारी कर्मचारी की तनख्वाह के बराबर होता है।

दावों पर गौर करें तो इनकी (सरकारी कर्मचारियों) मिलीभगत के चलते इनके विरुद्ध स्थानीय प्रशासन कोई कर्रवाई करने का जोखिम नहीं उठता। ग़ौरतलब हो कि बांद्रा पूर्व स्थित गवर्नमेंट कॉलोनी में विभिन्न विभाग के सरकारी कर्मचारियों का निवास स्थान है। इस इमारत के बाहर रिक्त जगहों को लोहे के तारों की ग्रिल से चौगर्दी घेरा गया है। तथा सरकारी दिशा निर्देशों का बोर्ड लगा धूल खा रहा हैं ताकि उस रिक्त स्थान पर कोई अतिक्रमण न कर सके। फिर भी इस रिक्त स्थान पर अतिक्रमण किया जा रहा है और स्थानीय प्रशासन कार्रवाई करने के नाम पर दूम दबाएं बैठा है।

स्थानीय लोगों की माने तो प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता। प्रशासन की नाक के नीचे इस तरह का अवैध निर्माण किया जा रहा है और प्रशासन आंखे मूंदे बैठा है। खैर वो कहावत है ना सैयां भये कोतवाल ..अब डर कहे का..दावे अपनी जगह है लेकिन हकीकत तो यह हैं कि उन दावों को झुठलाया भी नहीं जा सकता, तभी प्रशासन कार्रवाई नहीं कर रहा है।

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