अभी और कितने कठुआ और उन्नाव देखने होंगे ।

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कठुआ में 8 वर्ष की मासूम के साथ हुए समुहिक दुष्कर्म की घटना ने सवा सौ करोड़ भारतीयों को झकझोर कर रख दिया। आपको बता दे कि , 10 जनवरी को करीब 12:30 बजे आसिफा जंगल में घोड़े के लिए चारा लेने गई थी, जिसके बाद वह नहीं लौटी। जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज की गई, जांच में पता चला कि उसे बंधक बनाकर एक मंदिर में रखा गया और कई दिनों तक दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई। इस निर्मम घटना के बाद देश मे शोक की लहर फैल गयी। नेता से लेकर अभिनेता ने इस घटना पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। फ़िल्मी हस्तियों ने भी इसकी कड़े शब्दों में निंदा की औऱ दोषियों को तत्काल मृत्युदंड देने की मांग की।
प्रियंका चोपड़ा से लेकर तापसी पन्नू और हेमा मालिनी इसकी कड़े शब्दों ने निंदा की।
एनसीआरबी की रिपोर्ट की माने तो भारत में हर 2 घण्टे में बलात्कार की नाकाम कोशिश होती हैं। हर आधे घण्टे में एक बलात्कार होता हैं। हर 4 घंटे में सामूहिक दुष्कर्म होता हैं। सभी घटनाएं, निर्भया और कठुआ जैसी नही होती जिन्हें लोगो का साथ मिलता हो , दिग्गज हस्तियों के साथ मिलता हो। हालांकि कानून में इस तरह के जघन्य अपराध के लिए कठोर दंड तो है लेकिन कानून के मकड़जाल में फसकर समय रहते न्याय की आस करना बेमानी साबित होता हैं।
आज मानव समाज इतना गिर गया हैं कि छह माह की दूधमूही बच्ची से लेकर बुजुर्ग महिला तक असुरक्षा के छाए में जी रही हैं।
कठुआ जैसी घटना भारत के हर गली मोहल्ले में होती है। कानून नपुंसक बन तमाशा देखता है। रसूखदारों के चलते तो कई मामलों में प्राथमिकी तक दर्ज नही होती। जांच की बात तो दूर की है। ऐसे माहौल में न्याय की गुहार किससे लगाई जाए। यहाँ कू कृष्ण भी तो नही है जो द्रौपती का चीरहरण रोक सकेगा।
देश मे न्यायिक प्रक्रिया कछुए के चाल से भी धीमी गति से चलती हैं। अपराधियों को सबक सीखाने तक तो हजारों घटनाएं अंजाम दे चुकी होती है ।
इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए 16 साल से कम उम्र के बच्चियों के साथ हुए दुष्कर्म में , अपराध साबित होने पर तत्काल मृत्युदंड का प्रावधान होना चाहिए। तब कही जाकर इस जघन्य अपराध पर लगाम लगाई जा सकेगी, अन्यथा कठुआ, बिहार के सासाराम और उन्नाव और न जाने ऐसे असंख्य इलाकों में दुष्कर्म होता रहेगा और हम सामूहिक चेतना के नाम पर कैंडल मार्च निकलेंगे, टी.वी पर कॉफी की चुस्कियों के साथ गरमा गरम बहस सुनेंगे, फिर पुलिस और इस भृष्ट सिस्टम को गरियाएँगे और दूसरे दिन फिर किसी सासाराम और उन्नाव की घटना के घटने तक का इंतजार करेंगे। निर्भया कांड के बाद जनाक्रोश को देख कर तो ऐसा लग रहा था कि अब देश मे इस तरह को घटना पर लगाम लगेगी परन्तु इसके विपरीत घटनाओं में इजाफ़ा हुआ हैं। जब तक दुष्कर्मियों को सरेआम फांसी पर नही लटकाया जाएगा तबतक इस देश मे दुष्कर्म होते रहेंगे।
शिवकुमार….

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