मुम्बई विद्यापीठ में असुरक्षित छात्र व कर्मचारी – आम आदमी युथ विंग

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मुम्बई विद्यापीठ के शंकरराव चव्हाण इमारत की खस्ता हालत देख कर लगता है कि कुलपति के पास अपनी इमारतों का दौरा करने का भी समय नही है।सूत्रों की माने तो इस इमारत में सुरक्षा के पूर्ण इंजामात नही किये गए है । चार मंजिला इमारत में लिफ्ट की निर्धारित जगह खुली हुई होने के कारण यहाँ हादसे होने की संभावना बनी हुई है। लिफ्ट के लिए निर्धारित सभी जगहों के निचले सतह में कचरे के ढेर लगा हुआ है जिसकी साफ सफाई भी नही की गयी है कचरा और पानी ज्यादा मात्रा में जमा होने के कारण डेंगू और मलेरिया जैसी खतरनाक बिमारियों का जन्मस्थल बन सकती है।

क्या इस इमारत की संरचनात्मक लेखा परीक्षा नही की गयी थी? यदि की गयी थी तो इसपर प्रशाशन द्वारा कुछ किया क्यों नही किया? यदि एक इमारत का हाल यह है तो बाकी की इमारतों की क्या हालात होगी ? मुम्बई विद्यापीठ द्वारा की जा रही लापरवाही हज़ारो विद्यार्थियों और कर्मचारी के स्वास्थ के लिए घातक हो सकती हैं।

ये बीमारियां ना ही मुम्बई विद्यापीठ बल्कि आस पड़ोस के रिहायसी इलाके (सांताक्रुज, कलीना) में भी पैर पसार सकती हैं।जहाँ पर इलेक्ट्रिक यूनिट लगाया गया है वहां निचली सतह पर पानी का जमाव उस बॉक्स को चालू करने वाले के जान को नुकसान पंहुचा सकता है। बिल्डिंग के सामने 25 फ़ीट का कुआँ है जो की जमीन की सतह से बिलकुल सटा हुआ होने के कारण बारिश के मौसम में किसी भी विद्यार्थी और कर्मचारी की दुर्घटनावश मौत का कारण बन सकता है अतः उसे जल्द से जल्द ढकने की आवयश्कता है । इमारत परिसर के पास से बह रहे खुले-नाले को बंद गटर के रूपांतरण करने की आवश्यकता है ।

बिल्डिंग की गेट पर टुटा हुआ दरवाजा , खुले हुए गटर, गंदे पानी वाला अंधकुआ, खुली हुई दीवारें , क्या मुम्बई विद्यापीठ के कुलगुरु किसी बड़े हादसे का इंतेजार कर रहे हैं। यदि इन सभी मुद्दों पर विचार कर के समाधान करना बहुत आवश्यक है।

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