क्षेत्र में नीम हकीमों द्वारा पशुचिकित्सा पालन ब्यवसाय-डॉ. अमित वर्मा

0
63

Report by Ravindra Pandey

सौजन्य गूगल , प्रतीकात्मक तस्वीर

मेरे प्रदेश के अधिसंख्य किसानों व गरीबो का जीवन आधार पशुपालन है ! किन्तु नीमहकीमों ने इस पशुपालन व्यवसाय को संकट व बरबादी के कगार पर ला दिया है ! आज प्रदेश मे सैकडो नीम हकीम जो कभी गौशालाओ मे सफाई कार्य कर चुके है , किसी चिकित्सक को कार्य करते देख चुके है या सरकार ने “गोपाल”, “पैरावेट” के रुप मे छोड दिए है जैसे पूरे प्रदेश मे अपने आप को फर्जी पशुचिकित्सक बताकर धडल्ले से पशुचिकित्सा कर रहे है !

 

ये लोग बिना सोचे समझे एंटिबायोटिक्स व हारमोन्स का प्रयोग कर रहे है जो मानव के लिए भी घातक बन रहा है !
ये नीम हकीम पैसो के लालच मे पशु का अमानवीय तरीको से गलत उपचार तो कर ही रहे है , गायनेकोलोजी केसेस मे पशु की विभत्स तरीके से बच्चेदानी फाड़ रहे है वहीं 2-3 दिन धन चूसकर किसान को भ्रमित कर रहे है कि यह पशु लोहे की सुंई खा गया है, ठीक नही हो सकता !

 

इस गलत पशुचिकित्सा ने एक ओर पशुओ को समाप्त करना प्रारंभ किया है वहीं आमजन, किसान,पशुपालक धोखाधडी के शिकार होकर अपने पशुओं को घाटे मे बेच रहे है !
इधर सरकार करोडो रुपये खर्च कर नस्ल सुधार के लिए कृत्रिम गर्भाधान करवा रही है ! ये 3-3 महीने का, कोई प्रशिक्षण लेकर निकले गोपाल,पैरावेट हो या फर्जी संस्थानों से निकले नीम हकीम, इन्होने पशुओ की संतति का सत्यानाश कर दिया है !

 

कमाल देखिए राज्य मे ब्रीडिंग पालिसी” को अंगुठा दिखाते धडल्ले से liquid nitrogen और semen बाजार मे खुले आम बिक रहे है ! मन मर्जी से कौन खरीद कर कहॉ किसकों लगा रहा है भगवान जाने ? कृत्रिम गर्भाधान का कार्य करते करते कब वह पैरावेट, गोपाल नीम हकीम पशुचिकित्सा करने लगता है कोई नही जानता ,और वहीं से क्षेत्र के पशुओ व पशुपालको के दुर्दिन प्रारंभ हो जाते है !!

 

राज्य मे नीम हकीमो ने बहुत बडी संख्या पशुओ को बॉझ कर दिया है , AI गन से बच्चे दानी मे छेद कर दिए है जिनके उपचार मे करोडो का व्यय किया जा रहा है ! किंतु ये पशु बॉझ क्यो बन गए ? इस पर कोई विचार नही करना चाहता !!
इस गंभीर समस्या के निदान के लिए जिम्मेदार राज्य की पशु चिकित्सा परिषद् एवं VCI दोनो मौन है , पशुपालन विभाग, जिला प्रशासन को कोई चिंता नही है। क्षेत्र के पशुपालक स्वाभाविकता मे इसको जीते जा रहे है ! पशुचिकित्सको को भी इनके कोई काय’वाही की आधिकार न होने के कारण भी ,ये तत्व खुले आम क्षेत्र मे झोला लेकर घूम रहे है ! ये काउंसिल नियमों का धडल्ले से उपहास उडा रहे है , सरकारी नीतियों पर अट्टहास लगाते दिख रहे है !!

 

भुगत रहा है वह पशु पालक गरीब किसान जो नीम हकीम मे फर्क नही कर पा रहा ! भुगत रहा है पशु चिकित्सा व्यवसाय ( profession) जो अपने रखवालो के साथ आंसू बहा रहा है !अभी भी समय है जब काउंसिल, विभाग , पशुचिकित्सको को अपनी नींद तोडनी होगी प्रदेश के पशुओ के जीवन अधिकारों के साथ खडा होना होगा ! क्या कोई राजनैतिक हस्ती इन मूक पशुओं के लिए अपना कीमती समय देगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here