अपनी रीढ़ को बचाएं- नानावती ने शुरू की अनूठी सामुदायिक जागरूकता पहल

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Report by Deepak Baswala

तकनीकी प्रगति ने रीढ़ की हड्डी जैसी जटिल सर्जरी को आसान और सटीकता के साथ करना संभव कर दिखाया है। नानावटी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के तत्वावधान में नानावटी इंस्टीट्यूट ऑफ स्पाइन सर्जरी में हमने पिछले 1 साल में रीढ़ की हड्डी की 500 सर्जरी सफलतापूर्वक करने का एक बेंचमार्क बनाया है।
कोई व्यक्ति अस्पताल जाता है तो पिछले कुछ समय से रीढ़ की हड्डी का दर्द सबसे बड़ा कारण उभरकर आया है। स्वास्थ्य सेवा प्रणाली पर यह बहुत बड़ा बोझ है। ज्यादातर कर्मचारी रीढ़ की हड्डी के दर्द की वजह से ही सिक लीव लेते हैं और इसकी वजह से प्रोडक्टिविटी भी प्रभावित होती है। इस तरह हम कह सकते हैं कि रीढ़ की हड्डी के रोग के कई सामाजिक प्रभाव भी हैं। वर्ल्ड स्पाइन डे 2017 इनसाइट्स रिपोर्ट ने खुलासा किया कि भारत में पीठ और गले की अलग-अलग समस्याओं का इलाज करवाने वालों में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी 16 से 34 वर्ष आयु समूह की है। इस समस्या से सबसे ज्यादा पीड़ित है 35 से 54 वर्ष आयु समूह के लोग। इनकी सबसे बड़ी शिकायत रहती है कि पीठ के निचले हिस्से में दर्द हो रहा है, जो आम तौर पर एक हर्निएटेड डिस्क (स्लिप डिस्क) की वजह से होता है।
रिपोर्ट में लापरवाही के स्तर का खुलासा किया गया। उसके मुताबिक, इस बीमारी की मुख्य वजह पुणे में 53 प्रतिशत, नई दिल्ली में 49 प्रतिशत, बेंगलुरू में 46 प्रतिशत और मुंबई में 40 प्रतिशत लापरवाही है।
नानावटी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में, डॉ. मिहिर बापट के मार्गदर्शन में हमने समाज में रीढ़ की हड्डी के संबंध में जागरुकता पैदा करने के लिए अभियान शुरू किया है। ज्यादातर लोग रीढ़ की हड्डी में होने वाले दर्द को बरदाश्त करते हैं। कई महीने तो कई साल तक वे डॉक्टर से परामर्श भी नहीं करते। हमारा उद्देश्य यह जागरुकता लाना है कि रीढ़ की हड्डी से जुड़ी 85 प्रतिशत समस्याएं साध्य हैं। उनका फिजियोथैरेपी, रिहेबिलिटेशन, इंजेक्शन और उचित सुविधाजनक ट्रेनिंग के जरिये इलाज हो सकता है। स्पाइन सर्जन या ट्रेंड फिजियोथेरेपिस्ट इसमें मदद कर सकता है। यदि इलाज के बाद भी दर्द रहता है, तो उसकी तत्काल जाँच जरूरी है। जटिल केस में एडवांस सर्जरी के जरिये मरीजों को आराम मिला है।
नानावटी हॉस्पिटल ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया है, जहाँ रीढ़ की हड्डी के मरीज को अपनी बीमारी के डरावनी और भयावह यादों को वे साझा कर सकते हैं और सर्जरी के बाद उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को वे सबके सामने रख सकते हैं। स्पाइन सपोर्ट ग्रुप रीढ़ की हड्डी और रीढ़ की सर्जरी से जुड़े मिथकों को तोड़ने में मदद करेंगे। रीढ़ की हड्डी से जुड़े मामलों से जूझ रहे लोग मरीज से सीधे बातचीत कर सकते हैं, जिन्होंने सफल सर्जरी कराई है। वे सर्जरी के सकारात्मक नतीजों को जान सकते हैं। सपोर्ट ग्रुप उन्हें इसमें मदद करेगा।
नानावटी इंस्टिट्यूट ऑफ स्पाइन सर्जरी के डायरेक्टर डॉ. मिहिर बापट ने कहा, “हम यह देख रहे हैं कि महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में युवा आबादी रीढ़ की हड्डी की समस्या का सामना कर रही है। शुरू में वे अपनी समस्या की उपेक्षा करते हैं। जब समस्याएं जटिल हो जाती हैं तो वे उपचार के लिए आते हैं। हमारा लक्ष्य रीढ़ की हड्डी के विकारों और नवीन तकनीकों के बारे में जागरूकता पैदा करना है, जिससे मरीजों को अपनी रीढ़ की समस्याओं को दूर करने में मदद मिलेगी। नानावटी में हम नियमित रूप से स्लिप डिस्क से लेकर दुर्लभ ट्यूमर और डिफॉर्मिटी को सुधारने के लिए सर्जरी करते हैं। माइक्रोस्कोप्स और नेविगेशन जैसी नवीनतम तकनीकों की मदद से हम छोटा-सा छेद कर सर्जरी को अंजाम देते हैं। इसमें बड़े चीरे लगाने की आवश्यकता नहीं होती। अंदरुनी छेड़छाड़ भी ज्यादा नहीं करनी पड़ती। मांसपेशियों को नुकसान भी कम पहुँचता है, जिससे खून भी कम बहता है और सर्जरी के बाद होने वाला दर्द भी कम होता है।”
नानावटी इंस्टिट्यूट ऑफ स्पाइन सर्जरी में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. अमनदीप गुजराल ने कहा, “रीढ़ की हड्डी की सर्जरी को लेकर लोगों को कई तरह के भ्रम हैं। लोग दर्द को दबाते हैं और अपनी विकलांगता को जारी रखते हैं लेकिन डर की वजह से रीढ़ की हड्डी की सर्जरी नहीं करवाते हैं। दर्द से छुटकारा पाने के लिए पेनकिलर्स खाने की आदत लग जाती है, जो सिर्फ दर्द को दबाती है। दर्द के कारण को हमेशा के लिए दूर नहीं करते। जबकि सही समय पर सर्जरी करने से रीढ़ की हड्डी के रोग को मूल से खत्म किया जा सकता है। मरीज एक बार फिर दर्दरहित जीवन जी सकता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि “हम यह देख रहे हैं कि महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में युवा आबादी रीढ़ की हड्डी की समस्या का सामना कर रही है। शुरू में वे अपनी समस्या की उपेक्षा करते हैं। जब समस्याएं जटिल हो जाती हैं तो उपचार के लिए आते हैं।”
वर्षों से, रीढ़ की हड्डी की बीमारियाँ मिलेनियल्स के बीच एक गंभीर समस्या के तौर पर उभरी है। गतिहीन जीवन शैली, डिजिटल गैजेट्स पर भारी निर्भरता की वजह से युवा पेशेवरों में पीठ दर्द के मामलों में तेजी आई है। चोट, खराब पोश्चर, मोटापा, भारी स्कूली बैग जैसे कारणों की वजह से रीढ़ की हड्डी का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। कंप्यूटर का विशेष उल्लेख करना होगा और रीढ़ की हड्डी के दर्द को ज्यादातर लोग ‘कंप्यूटर रोग’ कह सकते हैं।
पीठ दर्द चिंता का एक विषय है। इसकी उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। शुरुआती निदान और उचित उपचार की सलाह दी जाती है जो सर्जरी के जोखिम को कम करते हैं। इससे पीठ दर्द व रीढ़ की समस्याओं के बिना बेहतर जीवन जी सकते हैं।

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