देवभूमी उत्तराखण्ड के बारे में बातें

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उत्तराखण्ड के बारे में कुछ रोचक बातें

उत्तराखण्ड
फ़ोटो सौजन्य: गूगल

उत्तराखण्ड जो विभाजन से पहले उत्तरांचल था भारत के उत्तर में स्थित एक राज्य है जो 9 नवम्बर 2000 में भारत जे 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व आया। उत्तराखण्ड हिमालय के किनारे पर स्थित है जिसकी सीमा चीन और नेपाल से लगती है।

इसके उत्तर-पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण दिशा में उत्तर प्रदेश है। वर्ष 2000 से लेकर 2006 के बीच यह उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था जिसके उपरांत इसका नाम उत्तराखण्ड पड़ा। राज्य का निर्माण कई वर्ष के आन्दोलन के पश्चात् हुआ।

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क्यों उत्तराखण्ड(उत्तरांचल) होना चाहता था उत्तर प्रदेश से अलग??

उत्तराखण्ड
फ़ोटो सौजन्य: गूगल

 

अमूमन हर राज्य के विभाजन का कारण या तो आर्थिक होता है या तो राजनैतिक परन्तु उत्तराखण्ड एक अपवाद जैसा प्रतीत होता है। उत्तराखण्ड किसी भी प्रकार के राजनीतिक या आर्थिक कारण के वजह से उत्तर प्रदेश से अलग नही हुआ बल्कि आपनी अलग पहचान बनाने के लिये अलग हुआ।

उत्तरखण्ड उस समय का उत्तरांचल जब उत्तर प्रदेश से अलग हुआ तो उस समय वहां के लोगों का रहन सहन उत्तर प्रदेश के लोगों की तुलना में काफी विकसित था। अगर 1991 की जनगणना के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो अल्मोड़ा सबसे ज्यादा शिक्षित राज्य था। पहाड़ी राज्य होने के बावजूद भी कुमाऊं जिला और गढ़वाल इलाका बहुत ही ज्यादा शिक्षित और प्रगतिशील थे।

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उत्तराखण्ड
फ़ोटो सौजन्य: गूगल ( उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के नक्शे की फ़ोटो एक साथ) – प्रतीतात्मक चित्र

उस समय पूर्वांचल के अधिकतर लोग भरतीय आर्मी में कार्यरत थे या फिर हर परिवार से एक सदस्य तो कम से कम फ़ौज में होता ही था जबकि उत्तर प्रदेश में आधे से ज्यादा लोग गरीबी रेखा से नीचे आते थे।

अब जहन में ये सवाल आता है कि जब उत्तराखण्ड इतना सम्पन था तो अलग होने के मांग क्यों की?

हम आपको बता दें कि उनके अलग होने की मांग के पीछे का कारण था उनकी पहाड़ी पहचान और सभ्यता के अस्तित्व को बनाये रखना जो उत्तर प्रदेश की सभ्यता से काफी अलग थी।

वैसे तो उत्तराखण्ड के अलग होने की मांग काफी समय से चली आ रही थी पर इस मांग ने तब जोर जब उस समय की राज्य में सरकार यानी मुलायम सिंह ने उत्तरांचल को अलग करने की मांग में शामिल आंदोलनकारियों पर मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा पर अंधाधुंध गोलियां चलवा दीं। ऐसा कहा जाता है कि उन आंदोलनकारियों में शामिल महिलायों के साथ दुष्कर्म भी करवाया गया।

पर ये आंदोलन विभाजन की मांग को लेकर किया गया आखिरी आंदोलन था जिसके बाद उत्तराखण्ड जो उस समय उत्तरांचल था को उत्तर प्रदेश से अलग कर दिया गया। उत्तराखण्ड का नाम पहले उत्तरांचल था जो  2007 में उत्तराखण्ड हुआ। उत्तराखण्ड पर्यटकों के लिए एक आकर्षण का भी केंद्र है।

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क्यों है उत्तराखण्ड पर्यटकों की पसंद??

उत्तराखण्ड
फ़ोटो सौजन्य: गूगल

उत्तराखण्ड को ईश्वर की धरती या देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है। हिंदुओं की आस्था के प्रतीक चारधाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री यहीं स्थित हैं। उत्तर का यह राज्य गंगा और यमुना समेत देश की प्रमुख नदियों का उद्गम स्थल भी है। उत्तराखंड, वैली ऑफ फ्लॉवर (फूलों की घाटी) का भी घर है, जिसे यूनेस्को ने विश्व विरासत की सूची में भी शामिल किया है।

उत्तराखण्ड
फ़ोटो(वैली ऑफ फ्लॉवर्स) सौजन्य: गूगल

उत्तराखण्ड अपने हिल स्टेशनों मसूरी, अल्मोड़ा, नैनीताल, धनौल्टी, लैंसडाउन, वैली ऑफ फ्लॉवर और सत्तल के लिए काफी प्रसिद्ध है। ये भारत के कुछ बहुत ही खूबसूरत हिल स्टेशन हैं, जो हरियाली से ओतप्रोत, बर्फ की चादर ओढ़े चोटियों और रंगबिरंगे फूलों से भरे हैं। वैली ऑफ फ्लॉव की सुंदरता का तो जितना बखान किया जाए उतना कम है। इसमें 250 प्रकार के फूलों की प्रजातियां हैं जो आंखों को बेहद सुकून देतीं है।

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फ़ोटो(जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क) सौजन्य: गूगल

इसके अलावा यहाँ पर कई वन्यजीव अभ्यारण्य और राष्ट्रीय उद्यान भी हैं जो पर्यटकों को लुभाते हैं। नैनीताल जिले में सबसे बड़ा और पुराना नेशनल पार्क ‘जिम कार्बेट नेशनल पार्क’ स्थित है। यह पार्क विभिन्न जंगली जानवरों के अलावा बाघों के लिए जाना जाता है।

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